महोब्बत की मेरे यारब मुझे ऐसी सजा देना
वो बन जाये कोई मूरत मुझे मीरा बना देना
मैं बैठा हूँ लिए हाथों में तेरे इश्क का प्याला
ज़हर देना भले ही आज तू कोई दवा देना
समझते ही नहीं हैं दिल की धड़कन को खिरद वाले
इन्हें कुछ अब मेरे मौला अक्ल के भी सिवा देना
बहुत हलचल हैं तूफाँ में कही ये लौ ना बुझ जाये
जलाये जो चरागों को, कोई ऐसी हवा देना.................. Dr.Rohit "AYAAN"
Sunday, January 23, 2011
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