वो जब से मेरे खवाबों में आना नहीं भूले
पलकों पे हम भी ख्वाब सजाना नहीं भूले
भूले हो दोस्तों को दिल्लगी की बात पर
तुम दिल मे क्यूँ दीवार उठाना नहीं भूले
सोचा है दोष क्या दे अब नाखुदा को हम
मेहरबाँ ही जब तूफ़ान उठाना नहीं भूले
ना कर हक़-ए-बयान तू हर एक के सामने
दुनिया मे सभी ज़हर पिलाना नहीं भूले
रख कर के फूल को "अयान" मेरी कब्र पर
वो आज भी एहसान जताना नहीं भूले....................Dr.Rohit "AYAAN"
Monday, February 22, 2010
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