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Monday, February 22, 2010

वो जब से मेरे खवाबों में आना नहीं भूले
पलकों पे हम भी ख्वाब सजाना नहीं भूले

भूले हो दोस्तों को दिल्लगी की बात पर
तुम दिल मे क्यूँ दीवार उठाना नहीं भूले

सोचा है दोष क्या दे अब नाखुदा को हम
मेहरबाँ ही जब तूफ़ान उठाना नहीं भूले

ना कर हक़-ए-बयान तू हर एक के सामने
दुनिया मे सभी ज़हर पिलाना नहीं भूले

रख कर के फूल को "अयान" मेरी कब्र पर
वो आज भी एहसान जताना नहीं भूले....................Dr.Rohit "AYAAN"

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