बहुत दिनों में आज उसका हैं पयाम आया
गुजर गये जब उसके लब पे मेरा नाम आया
निकलते कैसे अयान उसकी मीठी यादों से
दुखाने दिल को वो हर सुबह हर शाम आया
ना दे सका था कल मुकद्दर जो मेरा मुझको
आज क्यूँ देने वो दुनिया का हैं निजाम आया
नाम लिख लेना शमा उसका दिलजलों में तू
आज मरने तेरे दर पे हैं "अयान" आया.................Dr.Rohit "AYAAN"
Sunday, January 23, 2011
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